मेरी दीदी का नाम अनन्या है। वे अट्ठाईस साल की हैं। दीदी की शादी को चार साल हो चुके थे लेकिन पिछले साल उनका तलाक हो गया। पति के साथ तालमेल नहीं था। उसके बाद से दीदी वापस घर आ गईं। मम्मी-पापा अब हमारे साथ नहीं रहे इसलिए घर में सिर्फ मैं और दीदी रहते हैं।
दीदी हमेशा से मेरी सबसे अच्छी दोस्त रही हैं। बचपन में हम साथ खेलते थे साथ सोते थे और एक-दूसरे के राज बताते थे। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े हुए दीदी का बदन खिलने लगा। उनकी गोरी चिकनी त्वचा चमकने लगी थी। लंबे काले बाल कमर तक लहराते थे। उनकी भरी हुई छत्तीस साइज की चूचियाँ आकर्षक लगती थीं। पतली कमर और गोल मटोल गांड उनके शरीर को और भी मोहक बनाती थी। जब वे घर में शॉर्ट्स और टॉप में घूमतीं तो उनकी जाँघें और ऊपरी हिस्सा दिखता। मेरा मन अजीब हो जाता। मैं खुद को कोसता। यह दीदी है आरव। गलत सोच भी मत। लेकिन दिल नहीं मानता था।
तलाक के बाद दीदी काफी उदास रहने लगीं। वे अक्सर मेरे कमरे में आकर बैठ जातीं। सिर मेरे कंधे पर रख देतीं। आरव मुझे लगता है अब कोई मुझे प्यार नहीं करेगा। वे कहतीं। मैं उन्हें गले लगाकर कहता। दीदी मैं हूँ ना। लेकिन वो गले लगाना अब पहले जैसा नहीं रह गया था। उनके बदन की गर्माहट मुझे महसूस होती। उनकी मीठी खुशबू मेरी नाक में भर जाती। उनके नरम स्तन मेरे सीने से सटते तो मेरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती। सब कुछ मुझे उत्तेजित करने लगा।
एक रात बारिश बहुत तेज हो रही थी। बिजली चली गई। हम दोनों लिविंग रूम में मोमबत्ती जलाकर बैठे थे। दीदी ने हल्का सा नाइट सूट पहना हुआ था। उनका पल्ला सरका हुआ था जिससे उनकी गोरी जाँघें दिख रही थीं। मोमबत्ती की पीली रोशनी उनके चेहरे पर पड़ रही थी। उनकी साँसें थोड़ी तेज थीं।
आरव ठंड लग रही है। दीदी ने कहा और मेरे पास सरक आईं। मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया। दीदी का सिर मेरे सीने पर था। उनकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं। गर्म और नम साँसें। मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा।
दीदी आप बहुत सुंदर हो। मैंने अनजाने में कह दिया।
दीदी ने ऊपर देखा। उनकी आँखों में नमी थी। आरव तू मुझे सच में प्यार करता है न।
बहुत दीदी।
उस पल हमारी नजरें मिलीं। दीदी ने धीरे से अपना चेहरा ऊपर किया। हमारे होंठ करीब आए। पहला किस हल्का काँपता हुआ था। दीदी ने आँखें बंद कर लीं। मैंने उन्हें और करीब खींच लिया। किस गहरा होता गया। दीदी की जीभ मेरी जीभ से मिली। हम दोनों की साँसें तेज हो गईं।
आरव यह गलत है हम भाई-बहन हैं। दीदी फुसफुसाईं लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका।
दीदी आज सिर्फ हम हैं। कोई नहीं देख रहा। मैं आपको सालों से चाहता हूँ। मैंने कहा और उनके होंठ फिर चूस लिए।
मेरा नाम आरव है। उम्र चौबीस साल। मैं दिल्ली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मेरी दीदी का नाम अनन्या है। वे अट्ठाईस साल की हैं। दीदी की शादी को चार साल हो चुके थे लेकिन पिछले साल उनका तलाक हो गया। पति के साथ तालमेल नहीं था। उसके बाद से दीदी वापस घर आ गईं। मम्मी-पापा अब हमारे साथ नहीं रहे इसलिए घर में सिर्फ मैं और दीदी रहते हैं।
मैंने दीदी को उठाकर बेडरूम में ले गया। उनकी नरम गरम देह मेरी बाहों में पूरी तरह समाई हुई थी। उनकी भारी चूचियाँ मेरी छाती से दब रही थीं। मैं उन्हें सहारा देकर उठाए हुए था। मोमबत्ती की हल्की रोशनी में दीदी और भी खूबसूरत लग रही थीं। उनकी गोरी त्वचा पीली रोशनी में चमक रही थी। उनके लंबे बाल बिखरे हुए थे। उनका चेहरा शर्म और उत्तेजना से लाल हो रहा था।
मैंने उनके नाइट सूट का टॉप धीरे से ऊपर उठाया और उतार दिया। कपड़ा उनकी त्वचा पर रगड़ खाता हुआ निकला। उनकी चूचियाँ ब्रा में कैद थीं और ऊपर नीचे हिल रही थीं। मैंने ब्रा का हुक पीछे से खोला। हुक खुलते ही उनकी भारी गोल चूचियाँ आजाद होकर बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स सख्त होकर खड़े थे। मैंने एक चूची को दोनों हाथों से दबाया और मुंह में ले लिया। मैंने उसे जोर से चूसने लगा। मेरी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी।
आह आरव धीरे कितने साल बाद किसी ने छुआ है। दीदी सिसकार रही थीं। उनकी आवाज में वासना और राहत दोनों थी।
मैंने उनकी दूसरी चूची को हाथ से मलना शुरू किया। उंगलियों से निप्पल को हल्का दबाया और खींचा। दीदी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं। कभी दबा रही थीं कभी खींच रही थीं। उनकी साँसें तेज और गर्म हो रही थीं। मैंने उनका नाइट सूट पूरी तरह उतार दिया। दीदी अब सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी पैंटी पर एक बड़ा गीला धब्बा साफ दिख रहा था। चूत का रस पैंटी को भीगो चुका था। मैंने पैंटी को उनकी जाँघों से नीचे सरकाया और उतार दिया। दीदी की चूत साफ गुलाबी और हल्के बालों वाली मेरे सामने थी। उससे मीठी सी गंध आ रही थी।
मैं घुटनों पर बैठ गया और दीदी की चूत चाटने लगा। मेरी गर्म जीभ उनकी फूली हुई चूत की लकीर पर ऊपर नीचे घूमने लगी। मैंने क्लिट को चूसा और हल्का काटा। दीदी की कमर उठ रही थी। वे अपने कूल्हे आगे पीछे कर रही थीं। आरव आह वहाँ और चाटो दीदी की चूत को चूसो। उनकी आवाज काँप रही थी।
मैंने अपनी जीभ पूरी तरह अंदर डाल दी। चूत का गर्म और मीठा रस मेरी जीभ पर फैल रहा था। मैं जोर जोर से चूस रहा था। दीदी की जाँघें काँपने लगीं। उनकी उंगलियाँ मेरे बालों को कसकर पकड़ रही थीं। अचानक दीदी की देह तन गई। वे पहली बार झड़ गईं। उनका गर्म रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने उसे चाट लिया।
अब दीदी ने मेरी शर्ट और पैंट उतारी। उनकी उंगलियाँ मेरी छाती पर घूमती हुईं शर्ट के बटन खोल रही थीं। उन्होंने शर्ट को मेरे कंधों से उतारकर फेंक दिया। फिर उन्होंने मेरी पैंट की चेन खोली और पैंट को नीचे सरकाया। मेरी अंडरवियर भी उतार दी। मेरा लंड पूरा सख्त होकर खड़ा था। उसकी नसें फूल रही थीं और सिर चमक रहा था।
दीदी ने उसे देखा और बोलीं वाह आरव कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड। उनकी आँखों में हैरानी और भूख दोनों थी। उन्होंने आगे झुककर उसे हाथ में पकड़ा। उनकी नरम उँगलियाँ लंड के मोटे तने को घेर रही थीं। उन्होंने धीरे-धीरे ऊपर नीचे सहलाना शुरू किया। उनकी हथेली गर्म थी और लंड पर अच्छा दबाव दे रही थी। फिर उन्होंने मुंह खोला और लंड का सिर अपने गर्म गीले मुंह में ले लिया। दीदी बहुत अच्छा चूस रही थीं। उनकी जीभ लंड के चारों ओर लिपट रही थी। वे जोर से चूसतीं और फिर धीरे से निचोड़तीं।
मैं उनके बाल पकड़कर उनके मुंह में धक्के मारने लगा। लंड उनके गले तक जा रहा था। दीदी की आँखें नम हो गई थीं लेकिन वे रुकी नहीं। उनके मुंह से गर्म लार निकल रही थी जो लंड पर बह रही थी।
दीदी आप बहुत अच्छी चूसती हो।
फिर मैंने दीदी को बेड पर लिटाया। उनकी टाँगें फैलाईं। उनकी गोरी जाँघें पूरी तरह खुली हुई थीं। मैं उनके बीच में बैठ गया। मेरा लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। लंड का सिर उनकी गीली चूत की फाँक में दबा।
आह आरव धीरे सालों बाद हो रहा है। दीदी की आँखों में आँसू थे। उनकी साँसें बहुत तेज हो रही थीं।
मैंने पूरा लंड धीरे-धीरे अंदर कर दिया। दीदी की चूत तंग और गर्म थी। हर इंच अंदर जाते ही उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं। मैं धक्के मारने लगा पहले धीरे फिर तेज। हर धक्के पर दीदी चीख रही थीं हाँ आरव चोदो अपनी दीदी को जोर से मेरी चूत फाड़ दो।
मैंने उनकी चूचियाँ दबाते हुए चोदा। मेरे दोनों हाथ उनकी भारी गोल चूचियों को कसकर दबा रहे थे। उंगलियाँ नरम मांस में धंस रही थीं। मैं उनके गुलाबी निप्पल्स को बार बार निचोड़ रहा था। हर धक्के के साथ उनकी चूचियाँ ऊपर नीचे लहरा रही थीं। दीदी की चूत मेरे मोटे लंड को पूरी तरह निचोड़ रही थी। गर्म और चिपचिपा रस लंड पर लगातार बह रहा था।
फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। दीदी को घुटनों और हाथों पर मोड़ दिया। उनकी गोल मटोल गांड मेरे सामने पूरी तरह उभरी हुई थी। सफेद और नरम गांड के दोनों फंदे हिल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उनकी गांड को जोर से पकड़ा। उंगलियाँ नरम मांस में गड़ गईं। मैंने लंड की नोक उनकी चूत पर रखा और पीछे से जोर से लंड डाला। पूरा लंड एक झटके में अंदर चला गया।
दीदी आपकी गांड कितनी सॉफ्ट और गोल है।
हाँ गांड भी मार ले आज सब कुछ ले ले अपनी दीदी का।
रात भर हम चोदते रहे। दीदी कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत बार बार सिकुड़ रही थी और गर्म रस निकाल रही थी। मैंने आखिर में उनकी चूत के अंदर ही अपना गाढ़ा पानी छोड़ा। फिर दीदी ने मुंह खोला और मैंने उनके मुंह में भी छोड़ा। उन्होंने पूरा रस चाट लिया। उसके बाद मैंने उनकी चूचियों पर भी पानी छोड़ा। हर बार दीदी मुझे चूमतीं और कहतीं आरव अब तू ही मेरा सब कुछ है।
सुबह होने से पहले हम थककर लेटे थे। दीदी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को प्यार से सहला रही थीं।
आरव ये हमारा जिस्मानी रिश्ता है। दुनिया इसे गलत कहेगी लेकिन मेरे लिए ये प्यार है। जब तक हम दोनों हैं ये रिश्ता चलेगा।
मैंने दीदी के माथे को चूमा। हाँ दीदी। अब आप मेरी हो। आपकी चूत आपकी गांड आपकी चूचियाँ सब मेरे हैं।
उस रात के बाद हमारा रिश्ता पूरी तरह बदल गया। दिन में हम भाई-बहन बने रहते लेकिन रात को दीदी मेरे बेड पर आ जातीं। कभी वो मुझे चोदतीं कभी मैं उन्हें। कभी शावर में कभी किचन में कभी बालकनी में। दीदी अब पूरी तरह संतुष्ट रहती हैं। उनकी चूत हर रात मेरे लंड से भरती है।
ये हमारा गुप्त जिस्मानी रिश्ता है दीदी और छोटे भाई के बीच। दुनिया से छुपा लेकिन हमारे लिए सबसे खूबसूरत।