दीदी को जवान लड़के ने हचक कर चोदा

मेरे पापा का अपना बड़ा शोरूम है इलेक्ट्रॉनिक्स का।
घर में मैं और मेरी दिदिद ही है पापा के अलावा.
हमारी मम्मी दुनिया से विदा हो गयी थी.

मम्मी के गुजर जाने के बाद घर की देखभाल के लिए पापा एक आंटी को लेकर आए थे।

आंटी दिखने में बहुत ही आकर्षक, सांवली और गदराए बदन वाली थीं।
वे हमारे घर का सारा काम करती थीं। शुरू-शुरू में तो सब सामान्य रहा लेकिन धीरे-धीरे मैंने गौर किया कि पापा और आंटी के बीच कुछ पक रहा है।

अक्सर दोपहर में जब नेहा दीदी कॉलेज गई होती थीं तो आंटी पापा के कमरे में काफी समय बिताती थीं।

एक दिन मैंने की-होल (दरवाजे के छेद) से झाँका तो देखा कि पापा आंटी को नंगा करके उनकी चूचियाँ मसल रहे थे।

उस दिन पहली बार मैंने असली नंगा जिस्म देखा था और मेरा छोटा सा लंड निक्कर में फन उठाने लगा था।

नेहा दीदी मुझसे दो साल बड़ी थीं। वे बहुत ही सुंदर और मॉडर्न खयालात की थीं।

एक दिन नेहा दीदी ने मुझे आंटी के कमरे के बाहर खड़ा पाया।

दीदी ने मुझसे सख्ती से पूछा- विजय, तू यहाँ क्या कर रहा है? और तेरी निक्कर आगे से ऐसी क्यों उठी हुई है?

मैं डर गया और रोने लगा।
दीदी मुझे अपने कमरे में ले गईं।

वहाँ मैंने डरते-डरते दीदी को सब बता दिया कि पापा और आंटी कमरे में नंगे होकर क्या करते हैं।

दीदी यह सुनकर सन्न रह गईं लेकिन उनके चेहरे पर गुस्से के साथ-साथ एक अजीब सी उत्सुकता भी थी।

दीदी ने कहा, “चल दिखा मुझे, कहाँ से देखा तूने?”

मैंने दीदी को पापा के कमरे के पास ले जाकर वह छेद दिखाया।
दीदी ने जब अंदर का नजारा देखा, तो वे भी कांपने लगीं।

आंटी उस वक्त पापा का लंड मुँह में लेकर चूस रही थीं।

दीदी ने करीब दस मिनट तक वह सब देखा और फिर बदहवास होकर अपने कमरे की तरफ भागीं।

इस हॉट सिस्टर अडल्ट स्टोरी का आरम्भ यहीं से हुआ था.

उस रात घर में अजीब सा सन्नाटा था।
पापा सो चुके थे। मैं अपने कमरे में लेटा था कि तभी आंटी मेरे कमरे में आईं।
उनके हाथ में दूध का गिलास था।

उन्होंने मेरे पास बैठकर मेरे सिर पर हाथ फेरा और बोलीं, “विजय, आज तूने और नेहा ने हमें देख लिया था ना?”

मैं कांपने लगा, पर आंटी ने मुझे गले लगा लिया।
उनके नरम जिस्म के अहसास से मेरा डर गायब हो गया।

आंटी ने मुझसे कहा, “देख विजय, इसमें कुछ गलत नहीं है। तेरे पापा अकेले हैं और मैं उनकी जरूरत पूरी करती हूँ। लेकिन मुझे पता है कि अब नेहा भी जवान हो गई है और उसे भी किसी की जरूरत है।”

आंटी ने मुझे पट्टी पढ़ाई कि अगर मैं और नेहा दीदी आपस में प्यार करेंगे, तो किसी को पता नहीं चलेगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

वे उसी वक्त मुझे नेहा दीदी के कमरे में ले गईं।

नेहा दीदी अपने बेड पर लेटी हुई थीं।
वे सिर्फ एक ढीली नाइटी में थीं।

आंटी ने दीदी से कहा, “नेहा, तू क्यों तड़प रही है? देख विजय को, यह भी तो अब बड़ा हो गया है। जो सुख तुझे बाहर ढूँढना पड़ेगा, वो तेरा भाई तुझे यहीं दे देगा।
दीदी पहले तो बहुत हिचकिचाईं और बोलीं, “आंटी, यह पाप है!”

पर आंटी पूरी एक्सपर्ट थीं।
उन्होंने दीदी की नाइटी ऊपर कर दी और उनके हाथ मेरे नन्हे लंड पर रखवा दिए।
दीदी की छुअन से मेरा हाल बेहाल हो गया।

आंटी ने दीदी को समझाया कि यह कोई पाप नहीं, बस जिस्म की भूख है।

आंटी की बातों में आकर दीदी ने उस रात मुझे पहली बार अपने पास सुलाया।
आंटी ने दीदी को नंगा किया और मुझे उनके ऊपर लिटा दिया।

मैंने पहली बार दीदी की चूचियों को छुआ और चूमना शुरू किया।
दीदी भी जोश में आकर मुझे कस कर भींचने लगीं।

लेकिन जैसा मैंने पहले बताया था, मेरा लंड छोटा था।
मैंने बहुत कोशिश की, दीदी की चूत में लंड घुसा भी, पर दीदी की वासना ठंडी नहीं हो पाई।

वे कराहती रहीं, पर उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली जो वे चाहती थीं।

आंटी यह सब कोने में खड़ी होकर देख रही थीं।

अगले दिन सुबह, आंटी ने ही दीदी की चूत में उंगलियाँ डालकर उन्हें शांत किया और मुझसे कहा, “विजय, नेहा को ऐसे मजा नहीं आएगा। इसके लिए कुछ बड़ा इंतजाम करना पड़ेगा।”

उस दिन आंटी ने नेहा दीदी के साथ मेरी पहली चुदाई करवा कर मुझे इतना खुश किया कि मैं बार-बार आंटी को थैंक्यू बोल रहा था.

दीदी ने मुझसे कहा- ज्यादा आंटी को थैंक्यू थैंक्यू बोलने की जरूरत नहीं है, तुझे मजा तो मैंने दिया है!

आंटी की सलाह पर उस दिन रात को मैं और नेहा दीदी एक साथ बेड पर सोने का प्लान बना चुके थे.
आंटी पापा के साथ अपनी चुदाई के लिए उत्सुक थीं क्योंकि अब उन्हें हम दोनों भाई-बहन से कोई डर नहीं था.

रात का खाना खाने के बाद पापा अपने कमरे में आराम के लिए चले गए.
आंटी घर के काम निपटाने में लगी हुई थीं और मैं नेहा दीदी को लेकर अपने कमरे में चला गया.

हालांकि दीदी ने कहा था कि मैं उनके कमरे में चलूं, पर मैंने कहा- दीदी, आप मेरे कमरे में ही चलो.

उधर आंटी ने भी हमें बोल दिया कि अब वे भी पापा के साथ सोने जा रही हैं और अब हम दोनों भाई-बहन आजाद हैं.

मैंने कमरे में जाते ही दीदी को फिर से नंगी कर दिया और उन्हें बेड पर लिटाकर उनकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

दीदी ने पूछा- ये सब कहां से सीखा?
तो मैंने बताया- दीदी, टीवी पर देखा है.

दीदी ने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया और एक हाथ नीचे ले जाकर मेरा छोटा सा लंड पकड़ कर टटोला और बोलीं- भाई, इससे कुछ होता तो है नहीं, तू मुझे परेशान कर देता है.
मैंने कहा- दीदी, अबकी बार अच्छे से करूंगा.

मैंने अपना लंड एक बार फिर दीदी की चूत में घुसा दिया, पर उससे होना तो कुछ था नहीं … मैं तीन मिनट बाद ही नेहा दीदी के ऊपर निढाल होकर लेट गया.
दीदी बोलीं- हो गया तेरा काम? बस कर दिया मुझे गर्म, अब बता मैं क्या करूं?

दीदी नाराज होकर बोलने लगी थीं तो मैंने दीदी को प्यार से अपने पास लिटा लिया और हम दोनों सो गए.

रात को करीब एक बजे मेरी आंख खुली तो मैंने नंगी दीदी को देखा और मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.

मैंने दीदी को फिर से चोदना शुरू कर दिया.
परंतु दीदी को मजा नहीं आ रहा था और वे सिर्फ मेरे लिए ही चुदवा रही थीं.

इस तरह उस दिन मैंने रात में दीदी को तीन बार चोदा और फिर भी उनको सैटिस्फाई नहीं कर पाया.

सुबह पापा के शोरूम जाते ही आंटी ने मुझसे पूछा कि रात को कितनी बार मजा किया?
तो दीदी बीच में ही बोल पड़ीं- पहले आंटी मुझे अपनी उंगलियों से ठंडी करो, फिर कुछ बात करना!
आंटी पूरी एक्सपर्ट थीं.

उन्होंने दीदी को नंगी करके उनकी चूत में दो उंगलियां डाल दीं और उन्हें मस्त चुदाई का अहसास कराते हुए ठंडा कर दिया.

दीदी ने कहा- मैं पूरी रात सो नहीं पाई, तो अब पहले सोने जाऊंगी … फिर खाना खाऊंगी.

दीदी के जाने के बाद मैंने आंटी से पूछा कि दीदी मेरी चुदाई से खुश क्यों नहीं हो पातीं.
तो आंटी ने मेरी निक्कर नीचे करके मेरा लंड हाथ में लेकर कहा- तेरा ये छोटा है और नेहा को बड़ा और मोटा लंड चाहिए, इसलिए वह तुझसे ठंडी नहीं हो पाती.

मैंने आंटी से इसका कोई इलाज पूछा, तो उन्होंने बताया कि इलाज तो है, नेहा भी खुश हो जाएगी, पर उसके लिए मुझे उसे लेकर किसी दूसरे शहर में घूमने जाना पड़ेगा और उसके लिए सेठ जी से इजाजत लेनी होगी.

आंटी मेरे पापा से सेठ जी कहती थीं.
चूंकि वे हमारे घर में काम करती थीं और पापा का बिस्तर भी गर्म करती थीं तो हम सब उन्हें घर का ही मेम्बर मानने लगे थे.

आंटी भी अब बिना किसी हिचक के पापा के कमरे में उनके साथ सोने चली जाने लगी थीं.
मैंने आंटी को कहा कि मैं पापा से इजाजत ले लूंगा.

रात को जब पापा शोरूम से वापस आए, हम सबने एक साथ खाना खाया.
फिर पापा अपने कमरे में चले गए.

पीछे से मैं भी उनके कमरे में पहुंच गया और पापा से रिक्वेस्ट की- पापा, मुझे और नेहा दीदी को कहीं बाहर घूमने जाना है, उसके लिए आपकी इजाजत चाहिए.
पापा ने कहा- ठीक है, घूम आना पर कहां जाओगे, मुझे बता दो … मैं इंतजाम कर दूंगा.

मैंने पापा को थैंक्यू बोला और कहा कि सुबह बता दूंगा.

वापस आकर मैंने आंटी को बता दिया कि पापा ने इजाजत दे दी है और वे पूछ रहे हैं कि कहां जाना है!
तो आंटी ने कहा- पापा को बोल दो कि तुम्हें लखनऊ घूमने जाना है.

आंटी लखनऊ की ही थीं.

सुबह मैंने पापा को बोल दिया कि हमें लखनऊ घूमने जाना है.
पापा ने कहा कि ठीक है, मैं शाम तक इंतजाम कर दूंगा.

पापा ने शोरूम से फोन करके बताया कि हमारे लिए होटल बुक कर दिया है और आने-जाने की हवाई जहाज की टिकट भी कर दी है.
मैंने आंटी को बताया तो उन्होंने कहा कि ठीक है, मैंने भी नेहा को सब समझा दिया है.

अगले दिन हम लखनऊ पहुंच गए.
होटल में जाते ही सबसे पहले मैंने दीदी को नंगी किया और पूरे कमरे में नंगी घुमाते हुए चूमता-चाटता रहा, फिर जोर-जोर से चोदकर एक तरफ लेट गया क्योंकि दीदी को मुझसे कुछ होता ही नहीं था.

थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा कि उन्होंने आंटी के किसी रिश्तेदार को फोन किया है और वह होटल में आने वाला है, तो तुम उसे लेकर आ जाना.
मैं रूम से निकल कर होटल के रिसेप्शन पर आ गया. वहां एक बहुत ही खूबसूरत, हट्टा-कट्टा नौजवान खड़ा था और मेरा नाम ही पूछ रहा था.

मैंने उनसे पूछा कि क्या आप ही आंटी के रिश्तेदार हैं?
तो उसने हां बोल दिया.
जबकि वह आंटी का सिर्फ परिचित था.

मैं उसे लेकर रूम में आ गया और उनको बैठने को बोला.
तभी दीदी वॉशरूम से बाहर आई और उस नौजवान की सुंदरता देखकर अवाक खड़ी रह गईं.

मैंने दीदी को बताया- ये ही हैं जो हमसे मिलने आए हैं.

दीदी ने उस नौजवान से हाथ मिलाया और नाम पूछा.
तो उसने अपना नाम अभिषेक बताया.

दीदी को अभिषेक पसंद आया तो वे उससे सेक्स के लिए तैयार थी.

तभी दीदी ने मेरे कान में बोला- यदि चुदाई के बीच में मैं तुमसे छुड़ाने के लिए बोलूं तो तुम मुझे इससे तुरंत छुड़वा लेना.

फिर दीदी ने हिम्मत करके अभिषेक से कहा- आप सोफे से उठकर बेड पर आ जाइए.
अभिषेक ने दीदी का हुक्म माना और बेड पर चला गया.

दीदी ने मुझे सोफे पर बैठने को बोल दिया.

अब मैं सोफे पर था और अभिषेक बेड पर.
दीदी की हल्की सी मुस्कान पर अभिषेक ने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और चुंबनों की बौछार कर दी.

मैं देखता ही रह गया.
अभिषेक दीदी का पूरा रस निचोड़ रहा था.

पांच मिनट तक चुम्बनों का मजा लेने के बाद अभिषेक ने दीदी की टी-शर्ट उतार दी और उनकी चूचियां मसलने लगा.

अब तक दीदी सिर्फ मुझसे चूमा-चाटी करती थीं, परंतु आज उनके साथ एक पूरा जवान मर्द था … जो उन्हें हर तरीके से निचोड़ रहा था.

धीरे-धीरे अभिषेक ने दीदी को पूरी नंगी कर दिया और उनकी चूचियां दबाते हुए उनकी चूत पर मुँह ले जाकर अपनी जीभ चूत में डाल दी.
दीदी ने आज से पहले ऐसा कुछ नहीं किया था तो वे बदहवास सी होकर अभिषेक को चाटने काटने लगीं.

तब अभिषेक ने दीदी से बोला- मुझे भी नंगा कर दो.
दीदी ने एक मिनट में अभिषेक को नंगा कर दिया.

परंतु जैसे ही दीदी ने उसका अंडरवियर उतारा, तो उसका 8 इंच लंबा और काफी मोटा लंड देखकर दीदी बोलीं- आज तो मेरी खैर नहीं है!

अभिषेक ने उन्हें बांहों में लेकर बेड पर लिटा दिया और फिर से चुंबनों का दौर शुरू कर दिया.

दीदी ज्यादा देर रुक नहीं पाईं और खुद ही बोलने लगीं- अभिषेक, मेरे जिस्म में आग लगी हुई है … प्लीज मेरी आग बुझा दो, पहले जल्दी से मुझे चोद कर ठंडी कर दो.

अभिषेक इसी इंतजार में था.
उसने तुरंत दीदी की टांगों को फैला दिया और खुद टांगों के बीच में आ गया.

उस वक्त दीदी को कोई होश नहीं था, उन्हें बस लंड चाहिए था.
अभिषेक ने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और फिर दीदी की चूत पर लंड सैट करके एक जोरदार धक्का मार दिया.

धक्के से अभिषेक के मोटे लंड का आगे का बिना चमड़ी वाला टोपा दीदी की चूत में चला गया.
दीदी हल्की सी चीख उठीं और अभिषेक के नीचे पड़ी-पड़ी ऐंठने लगीं.

अब अभिषेक ने उनकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, इससे दीदी को दर्द कम हो गया और वे अपने चूतड़ ऊपर उठाकर लंड को अन्दर लेने का प्रयास करने लगीं.

अभिषेक बस इसी मौके की तलाश में था. उसने एक बहुत जोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लंड दीदी की चूत में उतार दिया.

दीदी चीख उठीं- आह मर गई मां फट गई मेरी चूत … बचा ले भाई मुझे.
तो मैं सोफे से उठकर दीदी के बेड पर चला गया और दीदी से पूछा- दीदी, चूत में से लंड निकलवाना है क्या?

दीदी बोली- भाई, अब क्या निकलेगा, अब तो इस सांड ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया है.
मैं चुप रहा.

फिर दीदी बोलीं- तुम सोफे पर ही बैठ जाओ. मैं झेल लेती हूँ इस सांड को!
मैं वापस सोफे पर आकर बैठ गया.

दो मिनट की शांति के बाद अभिषेक ने धीरे-धीरे अपने चूतड़ हिलाने शुरू कर दिए.
हर बार जब अभिषेक हल्का सा धक्का लगाता, तो दीदी सिसक उठतीं.

थोड़ी देर इसी तरह करने के बाद अभिषेक ने अपनी स्पीड धीरे-धीरे बढ़ानी शुरू कर दी.
अब दीदी उतनी परेशानी नहीं हो रही थी, अब वे हर धक्के पर मजा ले रही थीं.

लगभग बीस मिनट की लगातार चुदाई के बाद अभिषेक ने अपनी स्पीड एक्सप्रेस ट्रेन वाली कर दी और दीदी को रौंदना शुरू कर दिया.

उस वक्त वह किसी बात की फिक्र नहीं कर रहा था और न दीदी के कराहने की उसे कोई चिंता था.
वह अपने बमपिलाट धक्कों की ताकत की दम पर दीदी की चुत का भोसड़ा बनाए जा रहा था.

जैसा मैंने बताया था कि अभिषेक हट्टा-कट्टा नौजवान मर्द था, तो अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उसके धक्के कैसे रहे होंगे.
ऊपर से वह एक ऐसे समाज से था, जिधर उसका लंड आगे से चमड़ी रहित होता है. वैसे भी उसका लंड बहुत सख्त और मोटा था.

उसने दीदी को दर्द भरी आवाजें निकालने पर मजबूर कर दिया.
परंतु अब भी वह कुछ नहीं सुन रहा था.

इसी तरह उसने दीदी को आधा घंटा से ज्यादा देर तक चोदा.
दीदी रोती-चिल्लाती-चीखती रहीं, परंतु उन्होंने अभिषेक को चोदने से नहीं रोका.

आखिर अभिषेक ने अपनी पूरी ताकत से दीदी को चोदकर अपना सारा वीर्य उनकी चूत में भर दिया और झड़कर उनके ऊपर गिर गया.

मुझे भी सांस में सांस आई, वरना लग रहा था कि नेहा दीदी जिंदा नहीं बचेंगी.

दस मिनट के आराम के बाद दीदी ने अभिषेक को अपने ऊपर से हटाया और खड़ी होने की कोशिश करने लगीं परंतु वे वापस बेड पर गिर गईं.
उनकी हालत खराब हो चुकी थी.

इस हालत में भी उन्होंने अभिषेक को एक किस करते हुए कहा- थैंक्यू.
तो मैंने पूछा- दीदी, ये थैंक्यू किसलिए?

दीदी ने अपनी चूत की तरफ उंगली की और उसमें से निकलते हुए खून को दिखाकर बोली- मुझे पूरी औरत बनाने के लिए थैंक्यू बोला है.

अभिषेक दीदी को सहारा देते हुए उन्हें पकड़ कर वॉशरूम ले गया.
दीदी ने वहां पेशाब करने की कोशिश की, तो उनकी चीख निकल गई क्योंकि चूत फट चुकी थी और पेशाब निकलने से चुत में जलन हो रही थी.

अभिषेक ने दीदी को अपनी गोद में उठाया और लाकर वापस बिस्तर पर लिटा दिया.

मैं दीदी के सर में हाथ फेर रहा था और नंगी पड़ी दीदी के चेहरे पर अपनी चूत खुलवाने की संतुष्टि साफ देख रहा था.

अभिषेक ने दीदी से पूछा- अब मुझे क्या करना है?
नंगी दीदी ने कहा- अभिषेक, अभी हम यहां सात दिन तक रुकेंगे और मुझे तुमसे रोजाना से ऐसी ही चुदाई चाहिए.

अभिषेक बहुत खुश हो गया और दीदी को चूमने लगा.
मैं भी मस्ती से दीदी को देख रहा था.

दोस्तो, यह हॉट सिस्टर अडल्ट स्टोरी आपको कैसी लगी, प्लीज मुझे लिखें.
यदि आप सबके मेल से मुझे लगा कि आगे की सेक्स भी लिखनी चाहिए तो मैं अगली बार की सेक्स कहानी में आपको बताऊंगा कि किस तरह अभिषेक ने उस रात और फिर अगले कई दिनों तक दीदी को किस-किस तरह से चोदा.

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