मासूम लड़की चोद दी ट्रेन के सफर में

ब से लेकर अब तक मैंने कितनी ही लड़कियों, भाभियों और आंटियों को चोदा, लेकिन कभी लिखने का समय नहीं मिला और कभी समय मिला तो लिखने का मन नहीं किया।

इन 5 सालों में मैंने बहुत सारी एडवेंचरस चुदाई की।
वो सारी कहानियां मैं एक-एक करके आपके सामने प्रस्तुत करूंगा।

आप सब हर कहानी पढ़कर आहें भरना और मुट्ठ मारना!
और औरतें अपनी चुत में उंगली न करके किसी लड़के के लंड से चुदवा लेना; आपको मजा भी आएगा और किसी छीनरे गरीब का भला भी हो जाएगा।

अब आप लोगों को और बोर न करते हुए ले चलता हूं चुदाई वाली ट्रेन के सफर पर।

बात दरअसल यह है कि मैं पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर एक्टिंग भी करता हूं।
तो मुझे अपने थिएटर ग्रुप के साथ पूरे देश में घूमने का मौका मिल जाता है, इस बार की देसी गर्ल Xx कहानी भी उसी से जुड़ी हुई है।

हमारा ग्रुप इस बार ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर गया था।

हमारा एक सप्ताह का प्रोग्राम था जिसे खत्म करके हमको वापस आना था।
हुआ यह कि मुझे एक्टिंग करते देख एक ओड़िया डायरेक्टर को मैं पसंद आ गया जो कि इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे।

उनको मेरी तरह दिखने वाला एक बंदा चाहिए था, उन्होंने मुझसे बात की।

तो मैंने बोल दिया कि मेरा ग्रुप प्रोजेक्ट खत्म करने के बाद मैं आपके लिए काम कर सकता हूं।
हालांकि यह प्रोजेक्ट प्राइवेट था पर मुझे ओडिशा घूमने और नए लोगों से मिलने का मौका मिलता, इसलिए मैंने हां बोल दिया।

अब जब हमारे ग्रुप का प्रोजेक्ट खत्म हो गया तो मैं ओडिशा में डायरेक्टर के घर पर ही रुक गया।

फिर उस प्राइवेट प्रोजेक्ट पर लगभग 2 महीने तक काम किया… और उस दौरान भी तीन अलग-अलग औरतों को चोदा, जिसमें डायरेक्टर की बीवी और उसके पड़ोस में रहने वाली भाभी की बेटी और एक हमारे साथ प्रोजेक्ट पर काम करने वाली फोटोग्राफर थी।

वो कहानियां बाद में बताऊंगा।

तो यह प्राइवेट प्रोजेक्ट खत्म करके मैं भुवनेश्वर से वापस आ रहा था।
एसी 3rd क्लास का टिकट था, ट्रेन 12:30 बजे चली, मेरी सीट साइड लोअर थी।

मैं बैठकर मोबाइल चला रहा था।
ट्रेन ढेंकनाल स्टेशन पर रुकी और मेरे बगल वाली सीट पर एक बेहद सभ्य परिवार आकर बैठ गया।
उसमें एक अंकल, आंटी, एक भाभी और एक कोई 20–21 साल की लड़की थी।

जो भाभी थीं, उन्होंने आते ही बुर्का उतार दिया… क्या बला की खूबसूरत थी यार!
मेरा ध्यान न चाहते हुए भी उनकी ओर चला गया।

हालांकि मैं सफर में फैमिली वाले लोगों की तरफ ज्यादा ताका-झांकी नहीं करता क्योंकि उससे फैमिली वाले लोग अनकंफर्टेबल हो जाते हैं लेकिन भाभी की मासूम खूबसूरती थी ही इतनी कातिल कि मेरी आंखें भले मेरे मोबाइल पर लगी थीं, मेरा मन उनके प्यारे चेहरे पर ही ठहर गया था।

इसलिए वो लोग जो बातें कर रहे थे वो मैं न चाहते हुए भी सुन रहा था।
बातों से पता चला कि वो लोग इलाहाबाद जा रहे थे और उनका खुद का नॉन-वेज रेस्टोरेंट था जिसको कि यूपी सरकार तोड़ने वाली थी, जिससे वो लोग परेशान थे और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रहे थे।

मुझे सुनकर अच्छा नहीं लगा और मैं भी बातों में शामिल हो गया।
थोड़ी उनसे सहानुभूति दिखाई, सरकार की बुराई की, फिर अंकल से थोड़ी-थोड़ी बात होने लगी।

अंकल अच्छे व्यक्ति थे, वो अपनी तरफ से मुझे खाने के लिए केक देने लगे, मैंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया।

खैर, ऐसे ही रुक-रुक कर बातें होती रहीं।
ज्यादा बात अंकल और आंटी कर रहे थे, भाभी बस कभी-कभी हां में सिर हिला देती थीं।
मुझे बात करने के बहाने भाभी की मासूमियत निहारने का मौका मिल रहा था।

इन सबके बीच जो एक बात मैंने नोटिस की वो ये कि जो लड़की साथ आई थी वो मुझे बहुत गहरी नजरों से देखे जा रही थी।

मेरी नजर भी उससे कई बार मिली लेकिन उसने नजर हटाई नहीं, बल्कि मैं ही अनकंफर्टेबल होकर उससे नजरें हटा लेता था; काफी ढीठ थी वो।

खैर, धीरे-धीरे शाम होने लगी।
मुझे थकान सी लग रही थी, ऊपर से एसी की ठंडी हवा तो मुझे नींद आने लगी और मैं सो गया।

नींद तब खुली जब पेंट्री वाला खाने का ऑर्डर लेने आया।
मैं ट्रेन में खाना नहीं खाता, अपने फ्रूट्स, ड्राई फ्रूट्स वगैरह साथ में रखता हूं।
फिर भी मैंने वेज बिरयानी ऑर्डर कर दी।

सबने खाना खाया और 11 बजने वाले थे तो सब सोने की तैयारी करने लगे। अंकल की सीट दूसरे कोच में थी तो वो वहां सोने चले गए। लाइट्स ऑफ… और धीरे-धीरे सब अपने कंबल के अंदर। जो लड़की थी वो लोअर बर्थ पर सोई थी ठीक मेरे सामने, क्योंकि साइड लोअर पूरा मेरा था।

सब सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मोबाइल में पोर्न देखने लगा।

इतने में वो लड़की उठी और उसने मेरे मोबाइल की स्क्रीन साइड से देख ली लेकिन उसने कोई रिएक्शन न दिया बल्कि वो मेरी तरफ मुंह करके देखे ही जा रही थी।
मैंने अब तक कितनी ही लड़कियों को चोदा है और मुझे समझ में आ जाता है कि किस औरत का कब क्या मूड है और मुझे समझ में आने लगा था कि भाभी भले न मिलें, यह लड़की इंटरेस्टेड है और इसका शायद चोदवाने का मन है।

मैंने भी तय कर लिया कि ट्राई करते हैं, चुदेगी तो ठीक नहीं तो मेरा क्या जाता है!

तो मैंने मोबाइल की स्क्रीन थोड़ी और उसकी तरफ कर दी और वीडियो देखता रहा, वो भी देखती रही।
मैं अब मन में उसको चोदने के प्लान बनाने लगा और बात शुरू करने का तरीका सोचने लगा।

इसलिए कुछ देर बाद मैंने उसकी तरफ देखा और आंखों से इशारा किया तो उसने भी इशारे से जवाब दिया।
मैं समझ गया लड़की राजी है, यहां बात आगे बढ़ सकती है।

मैंने मोबाइल बंद कर दिया और नीचे रख दिया।
कुछ देर बाद मैंने पैर फैलाने के बहाने उसकी सीट पर रख दिए।
अब मैं उसको सामने से देख रहा था, वो भी कुछ देर तो बैठी रही फिर खिसककर मेरे पैर के पास आ गई जिससे उसकी जांघें मेरे पैरों से एकदम सट गईं।
यह तो एकदम ग्रीन सिग्नल था!

मैं अपने पैरों को उसकी जांघों पर रगड़ने लगा तो उसने कोई विरोध नहीं किया बल्कि अपने हाथों से मेरे पैरों को आहिस्ते-आहिस्ते छूने और सहलाने लगी।
अब सब कुछ क्लियर था।
मैं इतना तो क्लियर था कि लड़की की सहमति है।

बस फिर क्या था, मैंने अपने पैरों से उसके पैरों को फैलाने का इशारा किया। उसने अपनी टांगें खोल दीं और मैंने अपने अंगूठे को सीधे उसकी बुर पर रख दिया और अंदर ठेलने लगा। पता चला कि उसकी बुर पानी छोड़ चुकी थी। पैंटी और सलवार दोनों थोड़ी-थोड़ी गीली हो चुकी थीं।

मेरे पैरों का अंगूठा बड़े आराम से उसकी गीली बुर की फांकों पर मालिश कर रहा था और वो थोड़ा-थोड़ा हिल रही थी।
मेरे लंड का पानी इधर मेरी जॉकी अंडरवियर को भिगोकर डीकैथलान शॉर्ट्स को भिगोने की तैयारी कर रहा था।

उसकी बुर की फांकों को सहलाते हुए मैंने अंगूठा उसकी बुर में घुसाने की कोशिश की और एक बार अंगूठा कुछ अंदर घुस भी गया लेकिन उसने मेरा पैर पकड़ लिया।

मैं रुक गया।
मैंने उसको इशारा किया, “क्या हुआ?”
उसने ‘नहीं’ में सिर हिलाया।

मैंने फिर से सहलाना शुरू कर दिया लेकिन ठीक से हो नहीं पा रहा था और मन भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।

अब तो मन कर रहा था कि इसको झुकाकर इसकी बुर में लंड डाला जाए और इसकी कोमल चुचियों को पिया और मसला जाए, इसके कमसिन बदन को जमकर रगड़ा जाए, इसको खूब प्यार किया जाए, इसकी जवानी का पूरा रस लिया जाए।

लेकिन अभी कुछ कर तो सकते नहीं थे तो मैंने उसकी बुर को सहलाना जारी रखा।
इतने में ऊपर वाले बर्थ पर कुछ हलचल हुई तो मैंने तुरंत अपना पैर अपनी सीट पर खींच लिया।
पता चला कि उसकी मां जाग गई थी।

मैं अपनी सीट पर लेट गया जिससे उसकी मां को ये डाउट न हो कि मैं भी जाग रहा हूं उसकी बेटी के साथ।

उसकी मां ने उससे पूछा, “क्या हुआ सायमा? तुम सो क्यों नहीं रही?”
तो उसने अपना मोबाइल हाथ में लेते हुए बोला, “मैं एक पाकिस्तानी सीरियल देख रही हूं, कुछ देर में सो जाऊंगी, आप सो जाइए!”

आंटी जी कुछ देर में सो गईं।
मैं फिर धीरे से उठा और उससे नजरें मिलीं, वो मेरी तरफ ही देख रही थी।

हमारा नैन-मटक्का चल ही रहा था कि उसने मुझे अपनी उंगलियों से इशारा किया अपनी तरफ आने का।
मैंने कंफर्म किया इशारे से, “आऊं?”
उसने फिर से बुलाया!

मैं धीरे से अपनी सीट पर बैठे-बैठे उसकी तरफ झुक गया, वो भी अपनी सीट पर एकदम किनारे आ गई थी।
बस फिर क्या था, हमारे होंठ एक-दूसरे से मिल चुके थे!

अब उसका तो पता नहीं लेकिन मुझे डर लग रहा था कि कोई देख न ले, इसलिए मैंने कुछ सेकंड बाद खुद को अलग कर लिया।

लेकिन आग तो लग चुकी थी!
उसने फिर बुलाया और हमने इस बार कुछ ज्यादा सेकंड्स तक किस किया।
मैं फिर से अलग हो गया।

अब वो गुस्सा हो रही थी तो मैंने समझाया इशारे से कि कोई देख लेगा।
वो चुपचाप बैठ गई।

मैं भी बैठा रहा लेकिन अंदर से चोदने की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

मैंने सूखी नजरों से उसकी तरफ देखा, उसने भी मुझे देखा।

फिर मैंने इशारा किया आंखों से, “अब क्या?”
उसने भी सेम इशारा कर दिया।

हम दोनों चुप थे लेकिन कुछ देर बाद उसने अपने पैरों से मेरे पैरों पर ठोकर मारी।

मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने स्माइल करते हुए टॉयलेट की तरफ चलने का इशारा किया।

मैंने इशारा किया, “पहले तुम जाओ!”

वो उठी और धीरे से चली गई।
मैं बैठा रहा और देखता रहा कि किसी सीट पर कोई हरकत तो नहीं!

तीन-चार मिनट इंतजार करने के बाद मैं निश्चिंत हो गया कि उसकी मां और भाभी नहीं जाग रही हैं, तो मैं भी धीरे से उठा और टॉयलेट की तरफ चला गया।

वहां गया तो देखा कि एक तरफ का गेट हल्का खुला था।
बस मैंने धीरे से उसे हिलाया और बोला, “सायमा खोलो!”

उसने गेट खोला और मैं चारों तरफ देखते हुए अंदर चला गया।

अंदर जाते ही जैसे हमारे मन की मुराद पूरी हो गई थी।
मैंने उसको देखा और गले लगा लिया।

मेरी हाइट 5″11 है, वो शायद 5″7 रही होगी क्योंकि उसको गले लगाने में मुझे ज्यादा झुकना नहीं पड़ा।

गले लगाकर इतना सुकून मिला कि बता नहीं सकता!

5 मिनट गले लगने के बाद मैंने उसको खुद से अलग किया और धीरे से बोला, “तुमको डर नहीं लगा?”
वो बोली, “मैं बस दिखती मासूम हूं, लेकिन अंदर से हूं बहुत हरामी!”

मैं मुस्कुरा दिया और बोला, “इसलिए यहां चली आई है न…!”

वो भी मुस्कुरा दी और हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे।

इधर ट्रेन पूरी रफ्तार से भाग रही थी, उधर हमारे जिस्म की गर्मी एक-दूसरे को जलाने को पागल थी।

उसने मेरा नाम पूछा, मैंने अभिमन्यु बताया।
मैंने उसका नाम पूछा, उसने सायमा शेख बताया।

मैं उसको पागलों की तरह चूम रहा था, वो भी चूम रही थी लेकिन वो मेरे सामने कहां टिकती!
मेरा पचासों औरतों को चोदने और प्यार करने का अनुभव उस पर भारी था।

एक तरफ मैं उसके होंठों को चूसे जा रहा था, दूसरी तरफ मेरे हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसकी कमर और फिर उसकी गांड पर पहुंच गए।
इधर उसके होंठ चूस रहा था, उधर उसकी गांड मसल रहा था।

धीरे-धीरे वो गरम होने लगी और अपनी गांड हिला-हिलाकर मेरे लंड की तरफ धक्के मारने लगी।
मेरा लंड भी इंतजार कर रहा था कि कब मेरे शॉर्ट्स से बाहर निकलकर सायमा की बुर की फांकों को चीरते हुए उसके अंदर घुस जाए।

किस करते-करते मैंने सायमा को ट्रेन की दीवार से सटा दिया.

लेकिन अब गांड मसलने में दिक्कत हो रही थी इसलिए मैंने उसको गोद में उठाया और जो बेसिन बना होता है उसके शेल्फ पर बैठा दिया।

भारतीय रेल को धन्यवाद रहेगा, उन्होंने इस समय इतना अच्छा शेल्फ बनाया है कि उधर किसी को भी बैठाकर अच्छे से चोदा जा सकता है और बुर को चाटा और रगड़ा जा सकता है।

सायमा शेल्फ पर बैठकर पीठ के बल दीवार से सट गई।
अब उसने अपने दोनों पैर ऊपर करके शेल्फ के किनारे पर रख लिए जिससे उसकी बुर एकदम सामने आ गई और मेरे लिए उसके होंठों, गालों और गले पर चूमते हुए उसकी बुर की फांकों को सहलाना एकदम आसान हो गया।

मैं उसको चूमते हुए उसकी बुर को अपनी बीच वाली उंगली से रगड़ता रहा।

वो देसी गर्ल Xx इतने जोरदार तरीके से रगड़े जाने को संभाल नहीं पा रही थी, वो हिले जा रही थी।

इतने में उसने खींच कर मुझे अपने आप से चिपका लिया और मेरे सीने में अपना मुंह लगाकर चूमने-चाटने लगी।
वह इतनी ज्यादा उत्तेजित थी कि उसने मेरे सीने पर अपने दांत गड़ा दिए!

मैंने कहा, “आराम से करो, मैं यहीं पर हूं, कहीं जा नहीं रहा हूं!”
ये सुनकर वो धीरे-धीरे स्माइल करने लगी।
ट्रेन के सफर में मासूम लड़की पट गयी
में आपने पढ़ा कि मैं ट्रेन से जा रहा था कि एक परिवार की जवान लड़की से मेरी अँखियाँ लड़ गयी. वह मेरे नीचे बिछने को आतुर हो गयी. हमने वहीं बैठे बैठे किसिंग की और आगे की चुदाई के लिए टॉयलेट में आ गए.

अब आगे ट्रेन टॉयलेट Xxx कहानी:

मैंने मौका देखा अच्छा था, उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और वह मेरे शॉर्ट्स के ऊपर मेरे लंड को दबाने लगी।

फिर क्या था, मेरा लंड शॉर्ट्स को फाड़ कर बाहर आने को बेताब होने लगा।
मैं भी खड़े-खड़े उसकी बुर को अपनी उंगली से रगड़ता रहा।

अब मैं आगे बढ़ना चाहता था।
मैं उससे बोला, “अपनी कुर्ती उतार दो!”

उसने अपने हाथ ऊपर कर दिए और मैंने उसकी ब्लैक कुर्ती निकाल दी।

अब मेरे सामने ब्लैक कलर की ब्रा में उसकी 32 नंबर की चूचियां लहरा रही थीं।
मैंने अपने बड़े-बड़े पंजों से उसकी चूचियों को जकड़ लिया।

उसके मुंह से आह निकल गई!

मैं देर ना करते हुए उसको थोड़ा अपनी तरफ खींच कर पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
जैसे ही ब्रा गिरने वाली थी उसने अपने हाथों से ब्रा को पकड़ लिया.

मैंने हंसते हुए कहा, “शर्मा क्यों रही हो, मैं ही दबाऊंगा!”
वो स्माइल करने लगी।

मैंने ब्रा उसके हाथ से लेकर साइड में रख दी और झुककर उसकी चूचियों को पीने लगा।
दोस्तो, मुझे चूचियां पीना, उन्हें मसलना, उनके निप्पल से खेलना बहुत ही पसंद है और जब मैं चूचियां दबाते हुए पीता हूं तो लड़कियां क्या… भाभियां और आंटियां मेरे चूची पीने के तरीके की दीवानी हो जाती हैं!

सायमा भी मदहोश होने लगी… चूचियां पीते हुए मैं फिर से उसकी बुर की फांकों को रगड़ना शुरू किया, अब तो उसकी बुर और ज्यादा पानी छोड़ रही थी।
उसने अपने हाथ से मेरा लंड जोर-जोर से दबाना जारी रखा।

मैंने उससे पूछा, “मुंह में लोगी?”
उसने मना कर दिया।

मैंने बोला, “क्या हुआ?”
वह बोली, “अच्छा नहीं लगता!”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं!”

और फिर से उसके गले पर किस करने लगा।
वह मदमस्त होने लगी।

किस करते हुए मैं उसके पूरे शरीर जहां-जहां मेरा हाथ पहुंच रहा था, सहला रहा था।
अब मैंने उसको बेसिन से उतार कर खड़ा कर दिया और उसको घुमा दिया।

और पीछे से उसकी गांड और पीठ को सहलाने लगा।
कुछ देर बाद एक हाथ से उसकी एक चूची को पकड़ लिया।

अब मैं पीछे से उसकी एक चूची को पकड़ कर मसल रहा था और उसकी पीठ को चूम रहा था, वह एकदम पागल हो गई थी।

मैंने धीरे से कान में कहा, “अब अंदर डालूं?”
उसने कुछ नहीं बोला… बस स्माइल कर दी!

मैं समझ गया कि अब सायमा की बुर में अभिमन्यु का लंड पेलने का समय आ गया है।

फिर क्या था … मैंने खोल दिया सलवार का नाड़ा!
अब ब्लैक पैंटी में वो मेरे सामने थी… साली ने क्या मैचिंग कराई थी!
ब्रा पैंटी सबकुछ ब्लैक-ब्लैक… बस उसका जिस्म व्हाइट!

एक बार पैंटी के ऊपर से बुर की फांकों को सहलाया और फिर धीरे से नीचे सरका दिया।
अब मेरे सामने थी सायमा शेख की चिकनी गोरी-गोरी बुर और गोल-गोल गांड।

मैंने गांड पर जोर से स्पैंक कर दिया, वो छटपटा उठी।

बोली, “जानवर हो क्या?”
मैंने कहा, “अभी आगे देखो!”
वो बोली, “दिखाओ!”

ट्रेन टॉयलेट Xxx करने के लिए अब मुझसे रहा नहीं गया और बिना थूक लगाए ही पीछे से मैंने अपना लंड जिसको… मैं शॉर्ट्स को नीचे सरका कर पहले ही बाहर निकाल चुका था… उसकी चुत की दरार पर रखा और धीरे से धक्का दे दिया।

मेरा लंड तो थोड़ा सा ही अंदर गया.. लेकिन उसका मुंह खुल गया… और एक दर्द भरी आह निकल गई।

मैं बोला, “आवाज मत करो!”
वो बोली, “थोड़ा धीरे से डालो… दर्द हो रहा है!”

मैं हंस दिया।
मैंने मन में सोचा, “हां यार… यह भाभी थोड़ी है जिसकी बुर फैली हुई होगी!”

फिर मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे-धीरे उसकी बुर में घुसाने लगा… और धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी बुर में आधे से ज्यादा घुस गया।

वो कसमसाने लगी और मेरे लंड पर पीछे की तरफ गांड दबाने लगी।
बोली, “जोर से करो…!”
मैंने कहा, “जैसी तुम्हारी मर्जी!”

धीरे-धीरे हिलाते-हिलाते मैंने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और एक जोर का धक्का दे दिया!
लंड उसकी बुर के हर कोने को चीरता हुआ पूरा अंदर घुस गया।
उसके मुंह से “आआह्ह…” और गांड से पाद निकल गई!

वो छूटकर जाने की कोशिश करने लगी.
लेकिन मैंने उसकी कमर को पकड़ रखा था… जाती कैसे!

मैंने झुक कर उसके कान में धीरे से कहा, “मजा आया??”

वो बोली तो कुछ नहीं, लेकिन उसकी फूली हुई सांसें बता रही थीं कि वो लंड को अपनी बुर में एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी और अभी कुछ बोल पाने की हालत में नहीं थी।

जिसने कभी भी किसी लड़की को चोदा है उसको पता होगा… मर्द को सबसे ज्यादा संतुष्टि तब मिलती है जब औरत के अंदर लंड जाए और औरत की सांसें उखड़ने लगें।
और सायमा का पसीने से डूबा जिस्म और उखड़ती सांसें मुझे परम संतुष्टि दे रही थीं।

अब उसकी बुर में मैं धक्के पर धक्के मार रहा था।
हर धक्के के साथ उसके मुंह से “आ.. आ..” निकल जाता।
उसकी पूरी आह निकले, उससे पहले ही दूसरा धक्का लग जाता… उसकी गोरी मखमली गांड हिलोरे मार रही थी जैसे समंदर की लहरें।

मैंने फिर से दो थप्पड़ मार दिए गांड पर।
वो सांस थामते हुए बोली, “आवाज बाहर चली जाएगी!”

मैं भी सचेत हो गया।
हालांकि उसकी गांड लाल हो गई।

अब मैंने उसकी कमर छोड़कर उसकी चूचियों को पकड़ लिया।
चूचियां पकड़ के उसको मैं जोर के धक्के देने लगा। वो अपने आपको और अपनी सांसों को संभालने में लगी रही।
कभी वो बेसिन की टोटी पकड़ती तो कभी हाथ पीछे करके अपनी गांड फैलाती कि अच्छे से मेरा लंड घुस जाए।

सच में आज सायमा को चोदकर मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था!

मुझे मेरी स्पोकन क्लास वाली टीचर साजिया खान याद आ गई… जिसने मुझे होम ट्यूशन देते हुए.. अपनी बुर भी दे दी थी।
खैर, 5 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा वीर्य निकल जाएगा तो मैंने धक्के एकदम से रोक दिए।

वो पीछे मुड़ी और बोली, “रुक क्यों गए? करो न!”
मैंने कहा, “तुम अब घूमो, दूसरी तरफ से करूंगा!”

मैंने उसको घुमा दिया और उसको बेसिन शेल्फ पर बिठा दिया और उसकी टांगों को फैला दिया।
अब उसकी चुत मेरे सामने थी।

कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से नॉर्मल हो चुका था।
बस फिर क्या था, सुपारा रखा उसकी चुत पर और अंदर सरका दिया!
उसकी आंखें बंद हो गईं, वह मेरे लंड से पेलवाने का आनंद लेने लगी।

मैं उसके चेहरे को देखकर संतुष्ट हो रहा था।
चोदने के साथ-साथ एक हाथ से मैं उसकी बुर के ऊपरी हिस्से को रगड़ने भी लगा… वो तो जैसे पागल हो जा रही थी।
वो “अभिमन्यु, अभिमन्यु” करने लगी।

मुझे लगा कहीं इसकी आवाज बाहर न चली जाए, इसलिए एक हाथ से उसका गला पकड़ लिया मैंने।
और चुदाई और बुर मसलाई जारी रखी।

वो हिलने लगी… उसकी आंखें बंद होने लगीं… और मुझे पकड़ कर चिपक गई।

मैंने कहा, “क्या हुआ??”
मेरे सीने पर चिपकी रही… फिर मैंने पूछा, “हो गया क्या?”
बोली, “हां…!”

मैंने पूछा, “कैसा था?”
बोली, “मैं उड़ रही थी!”

मैंने फिर से चोदना चालू कर दिया।
तीन-चार मिनट और चोदने के बाद मेरा निकलने का हो गया।

मैंने कहा, “अंदर निकाल दूं?”
वो बोली, “नहीं… बाहर निकालो!”

जैसे ही मैं बाहर निकाल रहा था कुछ बूंदें उसकी बुर पर गिर गईं।

मैंने कहा, “यार अब तो रिस्क हो सकता है!”
वह बोली, “कोई बात नहीं मैं दवा खा लूंगी…!”

मैंने कहा, “तब एक बार और करते हैं…!”
वो बोली, “नहीं नहीं अम्मी उठ जाएंगी… मुझे जाना है बहुत लेट हो रहा है!”

मेरा मन तो चोदने से भरा नहीं था.
लेकिन क्या करता मजबूरी थी, हम ट्रेन के टॉयलेट में चोदम-पट्टी कर रहे थे।

मैंने कहा, “तुम मुझे अपना कांटेक्ट दे दो हम फिर मिलेंगे और जमकर पेला-पेली करेंगे!”

उसमें उसने बोला, “मेरे पास मोबाइल नहीं है… अब्बा मोबाइल नहीं रखने देते!”

मैंने कहा, “तुम मोबाइल चला तो रही थीं!”
वह बोली, “वह अम्मी का मोबाइल था!”

“तब मैं कैसे तुमसे जुडूंगा?” मैंने पूछा!
तो वह बोली, “मैं भाभी का इंस्टाग्राम दे देती हूं… उसके थ्रू हम बात कर पाएंगे!”

मैंने कहा, “भाभी को बताओगी… कोई दिक्कत नहीं होगी?”
वह बोली, “भाभी के खुद कई अफेयर हैं, मैं जानती हूं उनके बारे में… हम एक-दूसरे के राजदार हैं!”

मैंने पूछा, “तुम्हारे भाई क्या करते हैं?”
बोली, “कि वो कतर में रहते हैं. कार मैकेनिक हैं!”
मैंने कहा, “ठीक!”

फिर मैंने अपना इंस्टाग्राम खोल कर उसको दे दिया।
उसने उसमें अपनी भाभी की आईडी सर्च करी और फॉलो कर दिया।
इसके बाद फिर से मैं उसको किस करने लगा।

कुछ देर होंठों पर किस करने के बाद उसकी चूचियों को पीने लगा… और बुर को मसलने लगा.
वो फिर से गर्म होने लगी।

मैंने कहा, “चलो एक बार और करते हैं…!” वो तैयार भी हो गई!

इतने में दरवाजे पर दस्तक हुई!
उसकी अम्मी दरवाजे से उसका नाम लेकर बुला रही थी… खड़े लंड पर धोखा हो गया!

उसकी मां ने आवाज दी, “सायमा, बेटा.. बेटा..!”
हम दोनों डर गए।
अब क्या होगा!

हम दोनों कपड़े पहनने लगे।

मैंने तो तुरंत पहन लिए, उसने ब्रा और कुर्ती पहनी और बिना पैंटी पहने सलवार ऊपर चढ़ा ली।

मैंने इशारे से पूछा, “अब क्या करें?”
उसने मुझे इशारा किया, “मैं हूं ना!”

उसने मुझे कोने में कर दिया और थोड़ा सा गेट खोल कर बोली, “अम्मी… साबुन लेते आओ मैं टॉयलेट आई थी!”

उसकी मां साबुन लेने चली गई।
उसने गेट खोल कर देखा बाहर कोई नहीं था, उसने मुझे तुरंत बोला कि निकल जाओ!

मैं तुरंत बाहर निकल के दूसरी बोगी में चला गया और जाकर गेट के पास खड़ा हो गया।

20 मिनट बाद जब मैं वापस आया तो देखा उसकी मां नीचे सोई हुई थी और वो ऊपर।
मुझे लगा उसकी मां को डाउट हो गया क्या?
खैर, क्या ही कर सकता था।

अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन चुदाई की प्यास बुझाना भी तो जरूरी था।
मैं भी अपनी सीट पर सो गया।

मैंने कनखियों से ऊपर देखा वह जाग रही थी और मेरी तरफ ही देख रही थी।

मैंने होंठों से किस का इशारा किया… वो स्माइल कर दी।
मैं समझ गया सब ठीक है।

मैंने उसे सोने का इशारा किया कि चलो अब सो जाते हैं।
उसने बोला, “नींद नहीं आ रही है…!”

मैंने चुदाई का इशारा किया.
वह फिर से स्माइल कर दी।

फिर हम इशारों में कुछ देर ऐसे ही टाइमपास करते रहे।
और फिर मैंने इशारा किया कि मैं सोऊंगा।
वो बोली, “ठीक है” और एक फ्लाइंग किस दी।

मैंने उसको रिटर्न में फ्लाइंग किस दिया और करवट होकर चादर ओढ़ लिया।

मेरे दिमाग में उसकी चूचियां, उसकी बुर और उसकी गांड घूम रही थी।
और सच में उस पर बहुत प्यार आ रहा था… कि यार ये कितनी ऑसम है!

उसके बारे में सोचते-सोचते… पता नहीं कब मुझे नींद आ गई।
वैसे अच्छी तरह से चोदने के बाद मुझे नींद बहुत अच्छी वाली आती है… और फिर मैं सो गया।

मेरी नींद खुली सुबह 5:30 बजे।
देखा तो वह सो रही थी, उसकी मम्मी बैठी हुई थीं, उसकी भाभी बैठी हुई थीं।

मैं उठा, ब्रश किया, कुछ एप्पल रखे थे तो उसको खाया।
7:00 के करीब उसकी नींद खुली।

सुबह देखा कितनी मासूम लग रही थी… मन हुआ अभी इसी बोगी में ही उसको पटक कर पेल दूं, लेकिन ऐसा कर तो नहीं सकता था।

खैर, वह नजरें चुरा कर मुझे ही देख रही थी।
हम इशारों में बातें कर रहे थे… स्माइल कर रहे थे।

उसके अब्बा भी आ गए थे।
वह ब्रश करने चली गई और धीरे-धीरे मेरा स्टेशन आने वाला था।

मुझे बनारस में अपने एक सर से मिलना था इसलिए मुझे मुगलसराय उतरना था।

8:00 के करीब वो सीट पर आई।
मैंने इशारे से पूछा, “इतनी देर कहां थी?”

उसने इशारे से कुछ समझाया मुझे, बस इतना समझ में आया कि ब्रश कर रही थी।
फिर मैं पैंट लेकर टॉयलेट में गया, शॉर्ट्स उतारकर पैंट पहना… और आकर अपना सामान पैक किया।

उसने इशारे से पूछा, “यह क्या कर रहे हो?”
मैंने इशारे से बताया कि मुझे उतरना है।
उसने स्माइल कर दी।

15 मिनट बाद मेरा स्टेशन आने वाला था… मैंने सामान पैक किया, उसकी तरफ देखा।
वह भी मुझे ही देख रही थी।
मैंने उसे होंठों से चूमने का इशारा किया, आंख मारी और इशारा किया कि फिर मिलेंगे… उसने भी इशारे से चूमा और आंख मारी।

अब ट्रेन स्टेशन पर रुक चुकी थी, मैं सामान लेकर नीचे उतर रहा था… सायमा और ट्रेन पीछे छूट रहे थे।
मेरे दिमाग में घूम रही थी सायमा की चूचियां, उसकी बुर, उसकी गांड और उसका मासूम चेहरा.

तो दोस्तो, ये थी मेरी कहानी!
इसके कुछ दिन बाद इंस्टाग्राम पर मेरी उसकी भाभी से बात होने लगी और फिर इलाहाबाद जाकर मैंने उसकी भाभी को और उसको … दोनों को उनके घर जाकर चोदा!
वह कहानी जब आप लोग मैसेज करके कहेंगे तब बताऊंगा।

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