गर्म मंगेतर की बुर चुदाई का मजा

यह रोमांस लव सेक्स कहानी तब की है, जब मैं 21 साल का था.

उस वक्त मैं कॉलेज में स्नातक के सेकंड ईयर में पढ़ाई कर रहा था.
उसी वक्त मेरे पिताजी ने अपने दोस्त की लड़की से मेरी इंगेजमेंट करवा दी.
पिता जी का सख्त अनुशासन था तो मैं उनसे कुछ कह ही नहीं पाया.

पिता जी और उनके दोस्त का बिजनेस साथ में चलता था तो उन दोनों ने अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने का निर्णय लेते हुए मेरी शादी पक्की कर दी थी.

मैं उस लड़की को पहले एक-दो बार देख चुका था.
उसका नाम प्रभा था, वह 18 साल की थी.

प्रभा देखने में बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी थी … वैसा ही रूप-रंग, वैसा ही फिगर.

हमारी सगाई पूरे परिवार की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान से हुई.
उस वक्त तो मैं प्रभा से कुछ बात कर ही नहीं पाया और न ही उससे उसका फोन नंबर वगैरह ले सका.

इसी वजह से सगाई के 3 महीने गुजर चुके थे पर हमारी अब तक आपस में कोई खास बात या मुलाकात नहीं हो पाई थी.

कुछ दिनों बाद मेरे नंबर पर एक अनजान नंबर से कॉल आया.

मैं- हैलो, कौन?
सामने से आवाज़ आई- मैं हूँ प्रभा.

मेरी खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा.

उसने फिर कहा- हैलो … मैं प्रभा …
मैं- हां प्रभा, बोलो … तुम्हें मेरा नंबर कहां से मिला?

प्रभा ने हंस कर कहा- बस मिल गया, जिसके साथ पूरा जीवन बिताना है, उसका नंबर खोजना कौन-सी बड़ी बात है.
मैं- हां … बोलो, कैसी हो तुम? क्या काम था?

प्रभा- क्या हुआ? कुछ काम रहेगा तभी कॉल कर सकती हूँ क्या?
मैं- नहीं-नहीं … बस ऐसे ही पूछ लिया.

प्रभा- क्या हम कहीं मिल सकते हैं क्या?
मैं- हां, क्यों नहीं … तुम बताओ, कब मिलना है?

प्रभा- दीदी और जीजाजी पास में घूमने जाने वाले हैं … क्या हम भी चलें?
मैं- हां, क्यों नहीं … कब चलना है?

प्रभा- नेक्स्ट संडे!
मैं- ओके … मैं रेडी रहूँगा.

संडे की सुबह 8 बजे प्रभा का कॉल आया- मैं दीदी और जीजाजी के साथ बाइक पर आ रही हूँ, तुम मुझे रतनपुर वाले डैम के रास्ते पर मिलो … फिर हम साथ में चलेंगे.

नौ बजे करीब प्रभा, अपनी दीदी और जीजाजी के साथ डैम वाले रास्ते पर पहुंच गई.
मैं भी बाइक पर था तो प्रभा मेरे साथ आकर बैठ गई.

दीदी और जीजाजी आगे-आगे चलने लगे और कुछ दूरी पर हम थे.

प्रभा मुझसे कुछ दूर होकर बैठी थी तो मैंने एक जोर से ब्रेक लगाए.
वह मुझसे चिपक सी गई.

पहली बार कोई लड़की मेरे साथ इस तरह से बैठी थी.
उसका पूरा ऊपरी शरीर मेरी पीठ से चिपका हुआ था.

हम रास्ते भर यहां-वहां की बात करते हुए आखिरकार डैम पर आ पहुंचे.
डैम के पास एक बहुत अच्छा सा गार्डन था, जहां अक्सर कपल आया करते थे.

दीदी और जीजाजी की भी अभी शादी नहीं हुई थी, तो हम दोनों उन्हें अकेला छोड़ दूसरी तरफ एक बेंच पर बैठ गए.

पहले तो हम दोनों को समझ नहीं आया कि क्या बात करें.
फिर धीरे-धीरे हम पढ़ाई की, जॉब की और इधर-उधर की बात कर रहे थे.

तभी प्रभा ने पूछा- मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ?
मैं- तुम बहुत प्यारी हो … बहुत खूबसूरत हो मैं तुम्हें हमेशा अपने सीने से लगाकर रखूँगा.
प्रभा ने हंस कर कहा- तो फिर लगाते क्यों नहीं हो?

मैं उसकी बात सुनकर झेंप गया कि ये लड़की होकर भी कितनी बिंदास होकर बात कर रही है और मैं चूतिया सा उसके साथ कुछ कर ही नहीं पा रहा हूँ.

मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ कर खींचा और अपने सीने से लगा लिया.

हम दोनों की गर्म सांसें आपस में टकरा रही थीं.

धीरे-धीरे हमारे होंठ आपस में मिल गए.
ये हमारा पहला किस था, जो बहुत देर तक चला.

हम वहां करीब 2 घंटे रुके और बस किस करते रहे … कभी बूब्स पर हाथ लगाना, कभी उसका मेरे लंड पर हाथ फेरना यह अब भी हमारी पहली मुलाकात में हुआ और इसके आगे कुछ होने की गुंजाइश भी नहीं थी.
और शायद मैं उस वक्त उसके साथ ऐसा करने में डर भी रहा था.

वापसी में वह मुझसे रास्ते भर चिपक कर बैठी रही.
शाम में 4 बजे मैंने उसे छोड़कर घर वापस आ गया.

रात को करीब 11 बजे उसका कॉल आया.
मैं- हैलो!

प्रभा- कैसे हो?
मैं- बस तुम्हें ही याद कर रहा था.

प्रभा- मैं भी तुम्हें बहुत मिस कर रही हूँ.
मैं- क्या हम दोनों फिर से मिल सकते हैं?

प्रभा- हां, पर कहां?
मैं- कहीं पर भी … पर एकदम अकेले में, जहां कोई आता-जाता न हो.

प्रभा- ऐसी जगह कहां है?
मैं- किसी दोस्त के रूम पर मिलें क्या?

प्रभा- नहीं … मुझे किसी दूसरे के कमरे में मिलने से डर लगता है.
मैं- तो फिर कहां मिलना चाहती हो?

प्रभा- मेरे मम्मी-पापा अगले हफ्ते बाहर शादी में जाने वाले हैं … दीदी भी उनके साथ जा रही हैं. मेरे छोटे भाई का पेपर है, तो घर में मैं और वह ही अकेले रहेंगे. पूरा घर खाली होगा … क्या बोलते हो?

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई.
मैं- ठीक है … तो अगले हफ्ते पक्का.

उसके बाद हम दोनों ने खुल कर बात की कि हम दोनों जब मिलेंगे तो क्या क्या करेंगे.
मैंने उससे चुदाई की बात करनी चाही पर हिचक गया.
इसके उलट उसने अपनी आदत के अनुसार खुल कर कह दिया कि यदि तुम चाहो तो मेरे साथ सब कुछ कर सकते हो.

मैंने धीमे से कहा- क्या मैं कंडोम लेकर आऊं?
वह हंस दी और बोली- हां कंडोम बहुत जरूरी है. बिना उसके तो मैं गर्भ से हो जाऊंगी.

मैंने कहा- क्यों क्या तुम गर्भ से होना नहीं चाहती हो?
वह हंस कर बोली- शादी कर लेने के बाद अपने बच्चों की मम्मी बना लेना … मैं नहीं रोकूँगी.

मैंने कहा- ओके. मतलब अभी कंडोम लगा कर चुदाई करूं!
वह चुदाई शब्द सुनकर फिर से हंस दी और बोली- चलो तुम्हारी आवाज में कुछ तो बदलाव आया.

इस बार मैं भी हंस दिया.
फिर हम दोनों में सेक्स को लेकर काफी देर तक बात होती रही.

एक हफ्ते बाद मैं पूरी तैयारी से कंडोम लेकर रेडी था और उसके कॉल का इंतज़ार कर रहा था.
शाम के समय उसका कॉल आया.

उसने कहा- रात में दस बजे के बाद मैं साइड वाला दरवाज़ा खुला रखूँगी … तुम कॉल करके आ जाना और अपना मोबाईल साइलेंट पर ही रखना.

जैसे ही रात के दस बजे, मैंने उसके घर के साइड डोर पर जाकर कॉल किया. उसने दरवाजा खोल दिया.
उस वक्त उसने टी-शर्ट और लोअर पहना हुआ था. सच में कितनी सेक्सी लग रही थी वह … मैं बता नहीं सकता.

मैंने अन्दर आकर दरवाज़ा बंद कर लिया.
मैंने पूछा- तुम्हारा भाई कहां है?

उसने इशारे से बताया- वह खाना खाकर सो गया है … हम ऊपर वाले रूम में चलते हैं.

ऊपर के रूम में एक डबल बेड था. ये प्रभा का पर्सनल रूम था.
रूम के अन्दर जाते ही हमने एक-दूसरे को किस करना शुरू कर दिया.

किस करते हुए एक हाथ से मैं उसके बूब्स दबा रहा था, तो दूसरा हाथ उसकी कमर पर था.
फिर मैंने अपना हाथ कमर से हटाया और उसकी चूत के पास ले आया.

उसने पैंटी नहीं पहनी थी और उसकी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी.
मैंने उसकी चूत को सहलाना जारी रखा.

अब वह बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो चुकी थी.
वह मेरी पैंट के अन्दर हाथ डालकर मेरे लंड को जोर-जोर से दबा रही थी.

मैंने धीरे-धीरे उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिए.

हम दोनों पूरी तरह नंगे आपस में चिपक कर एक-दूसरे को सहला रहे थे.

रूम में पूरा उजाला था, जिस वजह से मैं उसके जिस्म के हर एक अंग को देख पा रहा था.

मस्त दूध थे एकदम रसीले आम जैसे … मैंने एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.
वह भी मादक हो गई और मेरे सर पर हाथ फेरती हुई मुझे अपने दोनों दूध बारी बारी से पिलाने लगी.

मैं उसके निप्पल को अपने होंठों में दबा कर खींचता और उसकी आंखों में वासना से देखता.
सच में वह दृश्य इतना कामुक था कि मैं जीवन में कभी नहीं भूल सकता.

ऐसा हम दोनों पहली बार कर रहे थे तो यह एक्ट लाइफ टाइम यादगार बन गया था.

फिर मैं उससे कुछ अलग होकर उसकी दोनों टांगों के पास आकर उसकी चूत देखने लगा.
एकदम गुलाबी सी, बिना बाल की प्यारी सी चूत मेरे सामने थी.

मेरा मन तो किया कि चूम लूँ पर मैंने उंगली से ही सहलाना ठीक समझा.
मैं उसकी चूत को रगड़-रगड़ कर उसकी हालत खराब कर चुका था.

प्रभा अब कांपने लगी और बोली- प्लीज़ कुछ करो … मैं पागल हो जाऊंगी!

मैंने उसकी चूत की फांक फैलाई और अपना लंड अन्दर डालने की कोशिश करने लगा.
पर लंड हर बार फिसल जा रहा था.

बड़ी मुश्किल से लंड का ऊपरी सिरा कुछ अन्दर गया, तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया.
उसे दर्द हो रहा था.

मैं कुछ पल रुका, उसे किस किया.
जब वह कुछ नॉर्मल लगी, तो मैंने एक जोर का झटका दे दिया.

मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अन्दर जा चुका था और उसने दर्द की वजह से अपने दांत मेरे कंधे पर बुरी तरह से गड़ा रखे थे.

फिर धीरे-धीरे मैंने लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया.
अब प्रभा कुछ ठीक लग रही थी.

वह बस मुझे किस किए जा रही थी.
कभी मेरे होंठों को चूमती, तो कभी गर्दन पर.

करीब दस मिनट के बाद हम लोग निढाल होकर एक-दूसरे से चिपके पड़े हुए थे.

कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर से सेक्स किया.
इस बार डॉगी स्टाइल में चुदाई की.
यह सेक्स भी करीब 20 मिनट तक चला.

हमने उस रात एक-दूसरे को खूब प्यार किया.
फिर मैं सुबह 4 बजे उठकर अपने घर वापस आ गया.

अब तो हम दोनों को चुदाई की लत लग गई थी.
जब भी मौका मिलता, हम कभी उसके घर में, कभी कहीं गार्डन में, कभी दोस्त के रूम में चुदाई करने लग जाते थे.

रोमांस लव सेक्स का ये सिलसिला 5 महीने तक चला.

फिर उसके पापा और मेरे पापा में बिजनेस को लेकर किसी बात में मनमुटाव हो गया और उसके पापा ने उसकी शादी कहीं और कर दी.

मैं उससे बहुत प्यार करता था.
मैंने उससे कहा भी कि भाग चलते हैं हम … घर वाले भाड़ में जाएं!

पर वह नहीं मानी.
उसे अपने बाप की इज्ज़त बहुत प्यारी थी.

आज भी जब हम कभी रास्ते में एक-दूसरे के सामने आते हैं, तो बड़ी हसरत से एक-दूसरे को देखते रह जाते हैं.

मैं हर वक्त इस बात को सोचता रहता हूँ कि यदि वह हिम्मत करके मेरा साथ देती, तो हो सकता था कि हमारे परिवार का मनमुटाव खत्म हो जाता

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